छत्तीसगढ़ सरगुजा

गौ हत्या क्यों? आस्था, संस्कृति और अर्थव्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

by Admin on | Jan 20, 2026 05:26 PM

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गौ हत्या क्यों? आस्था, संस्कृति और अर्थव्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

आदित्य गुप्ता


सरगुजा - भारत में गाय केवल एक पशु नहींबल्कि आस्थासंस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार रही है। बचपन से हमें सिखाया जाता है किगाय माता है वही गाय जो हमें दूध देती हैजिसकी सेवा को ईश्वर सेवा के समकक्ष माना गया है और जिसमें देवी-देवताओं का वास माना जाता है।इसके बावजूद आज सबसे बड़ा और पीड़ादायक प्रश्न यह है कि गौ हत्या आखिर क्यों हो रही है?

ग्रामीण भारत की रीढ़ कही जाने वाली गाय  केवल धार्मिक दृष्टि से पूजनीय हैबल्कि आर्थिक रूप से भी किसानों और पशुपालकों की आजीविकाका अहम साधन रही है। दूधगोबरखेती और जैविक खाद गौवंश का योगदान बहुआयामी है। फिर भी विडंबना यह है कि आधुनिकीकरण औरउपेक्षा के कारण गायें सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं और कई जगह तस्करी  अवैध कटान का शिकार बन रही हैं।

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि गौ हत्या के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्थिक लालच है। चमड़े का अवैध कारोबारतस्करीऔर मुनाफाखोरी इसके मुख्य कारक हैं। यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि इस अमानवीय कृत्य को किसी धर्मसमुदाय या संप्रदाय से जोड़ना केवल गलत हैबल्कि समाज को बांटने वाला भी है। ऐसे कृत्य करने वालों का कोई धर्म नहीं होता यह शुद्ध रूप से क्रूरता और अपराध है।

गौ हत्या को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। यह भारतीय संस्कृतिसभ्यता और सामूहिक संवेदनाओं पर सीधाप्रहार है। यदि देश को वास्तव में पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना हैतो गौवंश के संरक्षणविकास और सेवा को सामाजिक संकल्प के रूप में अपनानाहोगा। केवल दूध लेने तक सीमित सोच से आगे बढ़करहमें गाय की देखभालआश्रय और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना होगा।

समाज के हर वर्ग सरकारप्रशासनसामाजिक संगठन और आम नागरिक को मिलकर यह संदेश देना होगा कि बेजुबानों की हत्या किसी भी रूप मेंस्वीकार्य नहीं है। समय रहते चेतना नहीं जगीतो इसके दुष्परिणाम केवल गौवंश तक सीमित नहीं रहेंगेबल्कि हमारी संवेदनशीलता और नैतिकतापर भी प्रश्नचिह्न बन जाएंगे।

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