छत्तीसगढ़ Balod

जंगल बचाए कौन, जब काटने वाले ही अधिकारी हों? क्या वन विभाग में सागौन काटना ‘अघोषित सुविधा’ बन गया?

by Admin on | Jan 20, 2026 05:24 PM

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जंगल बचाए कौन, जब काटने वाले ही अधिकारी हों? क्या वन विभाग में सागौन काटना ‘अघोषित सुविधा’ बन गया?

बालोद। जिले में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है। जंगलों की रक्षा की जिम्मेदारी संभालने वालेअधिकारी ही “वनों के भक्षक” बन गए। इस मामले की शिकायत एक व्यक्ति ने वन विभाग के अधिकारी से की है। शिकायकर्ता का आरोप है किबेसकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई कराकर उससे अपने लिए टी-टेबलड्रेसिंग टेबल और अन्य फर्नीचर तैयार करवाए गए। इस मामले मेंतत्कालीन वनमंडल अधिकारी (DFO), रेंजरडिप्टी रेंजर सहित कई अधिकारियों की संलिप्तता की बात सामने  रही है। हैरानी की बात यह है किअवैध रूप से काटी गई सागौन की लकड़ी को सुरक्षित वन विभाग के काष्ठागार में लाया गया और यहीं से आरा-मिल में चिरान कराकर कारपेंटर तकपहुंचाया गया। मामले की शिकायत पर रायपुर से बालोद पहुंचकर टीम ने काष्ठागार में रखी सागौन की लकड़ी और कारपेंटर के यहां से तैयार चिरानको जब्त कर लिया है। जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन वनमंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल के निर्देश पर डौंडी रेंजर जीवन लालभोंडेकर को आदेश दिए गएजिसके बाद पूरे अवैध खेल को अंजाम दिया गया। बताया जा रहा है कि डौंडी परिक्षेत्र के बीटेझर बिट से यह कीमतीसागौन की लकड़ी भेजी गई थी। अधिकारियों को खुश करने के लिए उड़नदस्ता की गाड़ी से बिट गार्ड ईश्वर साहू के माध्यम से लकड़ी रवाना की गई।


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