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अंबिकापुर के ‘लाल जी’ ने रचा कीर्तिमान: 12 मिनट 53 सेकंड तक सूर्य त्राटक कर ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया’ में दर्ज कराया नाम

by Admin on | Mar 24, 2026 04:24 PM

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अंबिकापुर के ‘लाल जी’ ने रचा कीर्तिमान: 12 मिनट 53 सेकंड तक सूर्य त्राटक कर ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया’ में दर्ज कराया नाम


अध्यात्म और विज्ञान का अनूठा संगम, मां महामाया को समर्पित की उपलब्धि

आदित्य गुप्ता 

अंबिकापुर- शक्ति की अधिष्ठात्री मां महामाया की पावन नगरी अंबिकापुर में एक अद्भुत और प्रेरणादायक उपलब्धि सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद एवं साधक लाल विजय श्रीवास्तव (लाल जी) ने कड़ी धूप में 33 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच लगातार 12 मिनट 53 सेकंड तक सूर्य त्राटक (सन गेजिंग) कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया’ में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद लाल जी ने अपना प्रमाण पत्र मां महामाया के चरणों में समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यह सम्मान अंबिकापुर के कमिश्नर नरेंद्र कुमार दुग्गा द्वारा प्रदान किया गया। कमिश्नर ने लाल जी की असाधारण एकाग्रता और मानसिक क्षमता की सराहना करते हुए इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया और उनके प्रयासों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

ब्रेन एकेडमी: शिक्षा का बदलता स्वरूप

लाल विजय श्रीवास्तव ‘ब्रेन एकेडमी’ के संस्थापक हैं, जहां पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के मानसिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनका मानना है कि “एकाग्रता ही सफलता की असली कुंजी है।”

अभिभावकों से अपील

लाल जी ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे बच्चों को केवल रटने वाली शिक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वासी बनाने के लिए वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विधियों से जोड़ें। उनका दावा है कि त्राटक और अबेकस के संयोजन से बच्चों की स्मरण शक्ति और फोकस में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

अब नजरें अंतरराष्ट्रीय मंच पर

इस उपलब्धि के बाद लाल जी का अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, एशिया बुक एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की योग एवं ध्यान परंपरा को स्थापित करना है। साथ ही वे ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ और ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ जैसे मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए भी संकल्पित हैं।

अंबिकापुर के लाल जी की यह उपलब्धि न केवल शहर, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह सिद्ध करता है कि भारतीय योग, ध्यान और साधना की परंपरा आज भी विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ने में सक्षम है।

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