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संघर्ष से सफलता तक, रामरतन ने जीता रजत पदक

Dainik Editor • 21 अक्टूबर 2026
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संघर्ष से सफलता तक, रामरतन ने जीता रजत पदक

अखाड़े में शुरू हुआ सफर एशियन पैरा गेम्स तक पहुंचा, डिस्कस थ्रो में मिली बड़ी उपलब्धि

मथुरा। हौसले बुलंद हों तो कोई भी चुनौती मंजिल तक पहुंचने का रास्ता नहीं रोक सकती। इस कहावत को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की छाता तहसील स्थित नरी गांव के पैरा एथलीट रामरतन सिंह ने अपनी उपलब्धि से चरितार्थ कर दिखाया है। कभी गांव के अखाड़ों में कुश्ती और कबड्डी के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाने वाले रामरतन ने अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है। जापान के आईची प्रांत के नागोया में आयोजित पांचवें एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने डिस्कस थ्रो स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

अखाड़े से अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक का सफर

रामरतन सिंह का खेलों से जुड़ाव लंबे समय से रहा है। उन्होंने शुरुआत में कुश्ती और कबड्डी जैसे खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाई। इन खेलों ने उन्हें प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का अनुभव दिया। समय के साथ उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाई और डिस्कस थ्रो में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक हासिल करना उनके खेल सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनकी सफलता यह भी दर्शाती है कि गांवों में मौजूद खेल प्रतिभाओं को अवसर मिले तो वे बड़े मंच पर अपनी क्षमता साबित कर सकती हैं।

डिस्कस थ्रो में रजत जीतकर बढ़ाया देश का मान

जापान के नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में रामरतन सिंह ने डिस्कस थ्रो स्पर्धा में दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया। डिस्कस थ्रो में खिलाड़ी को निर्धारित घेरे से चक्का अधिकतम दूरी तक फेंकना होता है। इसमें शारीरिक क्षमता के साथ तकनीक, संतुलन, समयबद्धता और निरंतर अभ्यास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धा निर्धारित खेल श्रेणियों के अनुसार होती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना खिलाड़ी की तैयारी और प्रदर्शन का महत्वपूर्ण परिणाम है। रामरतन की इस उपलब्धि ने भारतीय पैरा खेलों में उनके योगदान को रेखांकित किया है।

नरी गांव में खुशी और गर्व का माहौल

रामरतन सिंह की सफलता से उनके गांव नरी और आसपास के क्षेत्र में उत्साह है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि है। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि खेल प्रतिभा किसी बड़े शहर तक सीमित नहीं होती, बल्कि गांवों की मिट्टी में भी ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं, जो देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों की मजबूत संस्कृति रही है। ऐसे वातावरण से निकलकर किसी खिलाड़ी का पैरा एथलेटिक्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना खेलों के बदलते अवसरों और संभावनाओं को भी सामने लाता है।

पैरा खिलाड़ियों के लिए बने प्रेरणा

रामरतन सिंह की उपलब्धि उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो चुनौतियों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। पैरा खेलों में नियमित अभ्यास, तकनीकी दक्षता, उचित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

उनकी सफलता इस बात की ओर भी ध्यान दिलाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं को मजबूत करना और पैरा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे अधिक खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।

मेहनत, लगन और हौसले की मिसाल

रामरतन सिंह की उपलब्धि केवल एक पदक जीतने की कहानी नहीं, बल्कि खेल के प्रति समर्पण और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का उदाहरण है। कुश्ती और कबड्डी के मैदान से शुरुआत कर डिस्कस थ्रो में अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल करने तक का उनका सफर युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है।

नरी गांव के इस पैरा एथलीट ने एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि से गांव, क्षेत्र और खेल प्रेमियों में गर्व का भाव है। रामरतन की यह सफलता ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की क्षमता और पैरा खेलों में आगे बढ़ने की संभावनाओं को नई पहचान देती है।

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